सेकड़ा ब्याज

2 रुपये सैकड़ा ब्याज कैसे निकालें? Simple Formula और Chart

अगस्त 31, 2026 • Ariz ...

2 रुपये सैकड़ा ब्याज कैसे निकालें: सरल फॉर्मूला और चार्ट

ब्याज, सैकड़ा दर या मूलधन, जो जानना हो वह चुनें। पहले से 2 सैकड़ा दर भरी है, बस अपनी रकम और समय डालें।

मूलधन (₹)
ब्याज दर
समय अवधि
साल
महीने
दिन
ब्याज का तरीका
ऊपर की जानकारी भरें, नतीजा यहीं दिखेगा।
ब्याज
मूलधन ब्याज
आपका हिसाब
कुल वापसी रकम
महीने का ब्याज
रोज का ब्याज (लगभग)
सालाना दर
हफ्ते का ब्याज (लगभग)
साल का ब्याज (मूलधन पर)
मूलधन
कुल अवधि
साधारण ब्याज में कुल
चक्रवृद्धि (मासिक) में कुल
चक्रवृद्धि में इतना ज्यादा देना पड़ेगा
चक्रवृद्धि में असली सालाना दर

समय के साथ कुल रकम कैसे बढ़ती है

साधारण चक्रवृद्धि

तालिका और तुलना

अवधिब्याजकुल रकम
दर (सैकड़ा)ब्याजकुल रकम
अवधिब्याजकुल रकम
मूलधनब्याजकुल रकम
महीनासाधारण में कुलचक्रवृद्धि में कुल
ब्याज कुल
एक नजर में
  • 2 रुपये सैकड़ा यानी हर ₹100 पर महीने का ₹2 ब्याज।
  • यह मूलधन का 2 प्रतिशत मासिक और 24 प्रतिशत सालाना है।
  • सूत्र: ब्याज = मूलधन × 2 ÷ 100 × महीने।

गांव-कस्बों और छोटे कारोबार के लेन-देन में ब्याज आज भी सैकड़ा में तय होता है, जबकि बैंक और कानून सालाना प्रतिशत में बात करते हैं। इस गाइड में 2 रुपये सैकड़ा को दोनों भाषाओं में समझाया गया है: सरल सूत्र, चार्ट, किस्तों की असली लागत और लेन-देन से पहले की सावधानियां।

₹100मूलधन2 रुपये सैकड़ा / माह1 माह12 माह₹24₹100 पर 1 साल का ब्याज
₹2₹100 पर महीने का ब्याज
₹20₹1,000 पर महीने का ब्याज
₹200₹10,000 पर महीने का ब्याज
24%सालाना दर

भाग 012 रुपये सैकड़ा ब्याज का मतलब क्या है?

सैकड़ा का मतलब है 100 रुपये पर हर महीने का ब्याज। 2 रुपये सैकड़ा यानी हर ₹100 पर महीने का ₹2, या मूलधन का 2 प्रतिशत हर महीने। 12 महीने में यह 24 प्रतिशत बन जाता है।

याद रखने का तरीका: मूलधन में से दो शून्य हटाएं और 2 से गुणा करें। ₹50,000 में से दो शून्य हटाने पर 500 बचता है, और 500 × 2 = ₹1,000 महीने का ब्याज।

अलग-अलग रकम पर 2 रुपये सैकड़ा का साधारण ब्याज:

मूलधनमहीने का ब्याजसाल का ब्याज
₹100₹2₹24
₹1,000₹20₹240
₹10,000₹200₹2,400
₹50,000₹1,000₹12,000
₹1,00,000₹2,000₹24,000
₹5,00,000₹10,000₹1,20,000

भाग 02सैकड़ा और सालाना प्रतिशत में फर्क

बाजार में दर मासिक सैकड़ा में बोली जाती है, जबकि बैंक सालाना प्रतिशत बताते हैं। दोनों को जोड़ने का नियम सीधा है: सैकड़ा × 12 = सालाना प्रतिशत। यानी 2 रुपये सैकड़ा सालाना 24 प्रतिशत है, जो कई बैंक लोन की दर से काफी ऊपर है। इसलिए फैसले से पहले दोनों को एक ही पैमाने पर रखकर देखें।

विशेषज्ञ नजरिया: किसी भी कर्ज की तुलना हमेशा सालाना प्रतिशत से करें। 2 रुपये सैकड़ा का सीधा मतलब 24% है, और अगर हर महीने का ब्याज मूलधन में जुड़ता जाए तो असली सालाना दर करीब 26.82% हो जाती है।
12%1 सैकड़ा18%1.5 सैकड़ा24%2 सैकड़ा36%3 सैकड़ा60%5 सैकड़ा

गोला जितना बड़ा, सालाना दर उतनी ऊंची

सैकड़ा (माह)सालाना दर1 लाख पर महीना1 लाख पर साल
1 रुपया12%₹1,000₹12,000
1.5 रुपये18%₹1,500₹18,000
2 रुपये24%₹2,000₹24,000
3 रुपये36%₹3,000₹36,000
5 रुपये60%₹5,000₹60,000

भाग 03हिसाब निकालने का तरीका: 3 स्टेप

ब्याज = मूलधन × सैकड़ा ÷ 100 × महीने
1महीने का ब्याज50,000 × 2 ÷ 100= ₹1,0002महीनों से गुणा1,000 × 12 महीने= ₹12,0003कुल रकम50,000 + 12,000= ₹62,000

समय हमेशा महीनों में बदलकर ही गुणा करें। साल को 12 से गुणा करें और दिनों को 30 से भाग दें।

समयमहीनों में
10 दिन0.33 महीना
15 दिन0.5 महीना
20 दिन0.67 महीना
45 दिन1.5 महीने
1 साल 3 महीने 15 दिन12 + 3 + 0.5 = 15.5 महीने

भाग 04उल्टा हिसाब: दर या मूलधन कैसे पता करें

कई बार ब्याज की रकम पता होती है और दर या मूलधन निकालना होता है। ऊपर कैलकुलेटर के "सैकड़ा दर निकालें" और "मूलधन निकालें" वाले विकल्प यही करते हैं। हाथ से करने के सूत्र ये हैं:

सैकड़ा दरब्याज × 100 ÷ (मूलधन × महीने)
मूलधनब्याज × 100 ÷ (सैकड़ा × महीने)
महीनेब्याज × 100 ÷ (मूलधन × सैकड़ा)

उदाहरण 1 (दर): 50,000 रुपये पर 6 महीने में ₹6,000 ब्याज दिया।

महीने का ब्याज6,000 ÷ 6 महीने= ₹1,000सैकड़ा दर1,000 × 100 ÷ 50,000= 2सालाना दर2 × 12= 24%

उदाहरण 2 (दर): 80,000 रुपये पर 10 महीने में ₹12,000 ब्याज। महीने का ब्याज 1,200 है, इसलिए दर 1,200 × 100 ÷ 80,000 = 1.5 रुपये सैकड़ा, यानी 18 प्रतिशत सालाना।

उदाहरण 3 (मूलधन): 2 रुपये सैकड़ा पर महीने का ₹5,000 ब्याज आ रहा है। मूलधन = 5,000 × 100 ÷ 2 = ₹2,50,000।

भाग 05साधारण बनाम चक्रवृद्धि ब्याज

साधारण ब्याज सिर्फ मूलधन पर लगता है, इसलिए हर महीने एक जैसा रहता है। चक्रवृद्धि ब्याज में हर महीने का ब्याज मूलधन में जुड़ जाता है और अगले महीने उस पर भी ब्याज लगता है।

चक्रवृद्धि कुल रकम = मूलधन × (1 + सैकड़ा ÷ 100)महीने
₹1,20,000₹2,28,103शुरू1 साल2 साल3 साल4 साल5 सालसाधारणचक्रवृद्धि

उदाहरण: ₹1,00,000 मूलधन, 2 रुपये सैकड़ा

अवधिसाधारण ब्याजचक्रवृद्धि ब्याजफर्क
1 साल₹24,000₹26,824₹2,824
2 साल₹48,000₹60,844₹12,844
3 साल₹72,000₹1,03,989₹31,989
5 साल₹1,20,000₹2,28,103₹1,08,103
काम की बात: लेन-देन करते समय पूछें कि ब्याज साधारण है या ब्याज पर ब्याज भी लगेगा। अवधि जितनी लंबी होगी, यह फर्क उतनी तेजी से बढ़ेगा। मासिक चक्रवृद्धि में 2% का असली सालाना असर (1.0212 − 1) करीब 26.82% बैठता है।

भाग 06किस्तों में चुकाएं तो असली ब्याज कितना बनता है?

ऊपर के हिसाब में ब्याज पूरे मूलधन पर पूरी अवधि तक लगता है। लेकिन अगर आप हर महीने किस्त देकर मूलधन घटाते जाएं और ब्याज सिर्फ बचे हुए मूलधन पर लगे, तो कुल ब्याज काफी कम बनता है। बैंक लोन में आम तौर पर यही तरीका चलता है।

मासिक किस्त = मूलधन × r × (1 + r)n ÷ ((1 + r)n − 1)
यहां r = 0.02 (यानी 2%) और n = महीनों की संख्या
₹10,000 पर 12 महीने का कुल ब्याज₹2,400सीधा ब्याज₹2,682चक्रवृद्धि (मासिक)₹1,347किस्तों में(घटते मूलधन पर)

₹10,000, 2 रुपये सैकड़ा, 12 महीने: तीन तरीकों में कुल ब्याज

अवधिसीधा ब्याजमासिक किस्तकिस्तों में कुल ब्याज
6 महीने₹1,200₹1,785₹712
12 महीने₹2,400₹946₹1,347
24 महीने₹4,800₹529₹2,689
विशेषज्ञ नजरिया: दोनों तरीकों में दर "2 रुपये सैकड़ा" ही कहलाती है, पर असली लागत बहुत अलग होती है। सौदा करने से पहले साफ पूछें कि ब्याज पूरे मूलधन पर लगेगा या बचे हुए मूलधन पर। ऊपर की किस्तें सामान्य सूत्र से निकाली गई हैं, असल में शुल्क या अलग शर्तें जुड़ सकती हैं।

भाग 06दिनों और बीच के भुगतान वाले उदाहरण

अलग अवधि पर 2 रुपये सैकड़ा का साधारण ब्याज:

अवधि₹1,000 पर ब्याज₹10,000 पर ब्याज
1 महीना₹20₹200
3 महीने₹60₹600
6 महीने₹120₹1,200
1 साल₹240₹2,400
2 साल₹480₹4,800
3 साल₹720₹7,200
5 साल₹1,200₹12,000

दिनों वाला उदाहरण: 1 लाख रुपये, 2 रुपये सैकड़ा, 8 महीने 20 दिन।

कुल अवधि8 + 20 ÷ 30 = 8.67 महीने
महीने का ब्याज1,00,000 × 2 ÷ 100 = ₹2,000
कुल ब्याज2,000 × 8.67 = ₹17,333
वापसी रकम₹1,17,333

बीच में मूलधन लौटाएं तो: आगे का ब्याज बचे हुए मूलधन पर ही लगना चाहिए। मान लें 1 लाख में से 6 महीने बाद 40,000 लौटा दिए।

पहले 6 महीने (1 लाख पर)2,000 × 6 = ₹12,000
बचा मूलधन1,00,000 − 40,000 = ₹60,000
अगले 6 महीने (60,000 पर)1,200 × 6 = ₹7,200
साल भर का कुल ब्याज₹19,200

बिना बीच के भुगतान के यही ब्याज ₹24,000 होता। इसलिए आंशिक भुगतान की तारीख और रकम रसीद पर जरूर लिखवाएं।

भाग 08सैकड़ा के हिसाब में होने वाली आम गलतियां

  • मासिक और सालाना दर मिलाना। 2 प्रतिशत मासिक को 2 प्रतिशत सालाना समझ लेना 12 गुना फर्क पैदा करता है। असली दर 24% सालाना है।
  • ब्याज पहले ही कट जाना। ₹50,000 के कर्ज में पहले महीने का ₹1,000 ब्याज काटकर ₹49,000 मिलें, तो ब्याज फिर भी ₹50,000 पर चलेगा। असली मासिक दर करीब 2.04% बैठती है।
  • सिर्फ ब्याज देते रहना। हर महीने ब्याज चुकाने से मूलधन नहीं घटता। कुल ब्याज तब तक रुकता नहीं जब तक मूलधन वापस न हो।
  • चक्रवृद्धि को नजरअंदाज करना। साधारण और चक्रवृद्धि का फर्क छोटी अवधि में कम और लंबी अवधि में बहुत बड़ा होता है। शुरू में ही लिखित तय करें।
  • महीने के दिन गिनने में अलग-अलग तरीका। हिसाब के लिए 30 दिन का महीना मानना आसान है। दोनों पक्ष एक ही तरीका अपनाएं।
  • आंशिक भुगतान का रिकॉर्ड न रखना। हर भुगतान की तारीख और रकम लिखें, ताकि बाद में बचे मूलधन पर ही ब्याज गिना जाए।

भाग 07लेन-देन से पहले की चेकलिस्ट

लिखित रसीदमूलधन: ₹ ______दर: ____ सैकड़ाअवधि: ______दर साफ लिखेंअवधि और तरीका तय करेंबैंक या रसीद से भुगतान
  • दर को सालाना में बदलकर देखें। सैकड़ा × 12 करके दूसरे विकल्पों से तुलना करें।
  • ब्याज का तरीका तय करें। साधारण है या चक्रवृद्धि, यह शुरू में ही लिखवा लें।
  • अवधि की तारीख लिखें। शुरू और खत्म होने की तारीख साफ हो, ताकि दिनों पर विवाद न हो।
  • रसीद और दस्तखत लें। दोनों पक्ष कागज पर दस्तखत करें और एक-एक प्रति रखें।
  • भुगतान का रिकॉर्ड रखें। बैंक ट्रांसफर या रसीद से लेन-देन करें, सिर्फ जुबान पर नहीं।
  • जल्दी चुकाने की शर्त पूछें। पहले चुकाने पर ब्याज घटेगा या नहीं, यह पहले तय करें।
  • अपने राज्य का नियम देखें। निजी साहूकारी की दर और लाइसेंस के नियम राज्य के हिसाब से अलग हैं।
जरूर करेंहर भुगतान की तारीख और रकम लिखकर रखें। हिसाब जांचने के लिए ऊपर का कैलकुलेटर इस्तेमाल करें।
बिल्कुल न करेंसिर्फ जुबानी दर पर भरोसा न करें। बिना रसीद नकद न दें। सैकड़ा और सालाना दर को आपस में न उलझाएं।

भाग 10कानून और टैक्स के नजरिए से जरूरी बातें

ब्याज पर लेन-देन सिर्फ गणित नहीं है, इसके कानूनी और टैक्स पहलू भी हैं। ये बातें सामान्य जानकारी के लिए हैं।

  • ₹20,000 या उससे ज्यादा का कर्ज नकद में नहीं। आयकर कानून की धारा 269SS और 269T के तहत ऐसे कर्ज का लेना और चुकाना बैंक ट्रांसफर, अकाउंट-पेयी चेक या ड्राफ्ट से होना चाहिए। उल्लंघन पर धारा 271D और 271E में रकम के बराबर जुर्माना लग सकता है।
  • ब्याज की कमाई पर टैक्स। जिसे ब्याज मिलता है, उसकी यह आय आम तौर पर "अन्य स्रोतों से आय" में आती है और रिटर्न में दिखानी चाहिए।
  • राज्य के साहूकारी नियम। लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन और ब्याज दर की सीमा राज्य के हिसाब से अलग होती है। अपने राज्य का नियम जरूर देखें।
  • लिखित सबूत। रसीद या प्रोनोट पर रकम, दर, तारीख और दोनों के दस्तखत रखें, और भुगतान बैंक के जरिए करें ताकि रिकॉर्ड बने।
सलाह: बड़ी रकम या विवाद की स्थिति में चार्टर्ड अकाउंटेंट या वकील से जरूर पूछें, क्योंकि नियम समय के साथ बदल सकते हैं।

भाग 08जरूरी शब्दों का मतलब

मूलधनजो रकम असल में उधार ली या दी गई, ब्याज जोड़ने से पहले की।
सैकड़ा100 रुपये पर हर महीने का ब्याज। 2 रुपये सैकड़ा यानी 2 प्रतिशत मासिक।
साधारण ब्याजसिर्फ मूलधन पर लगने वाला ब्याज, जो हर महीने बराबर रहता है।
चक्रवृद्धि ब्याजजिसमें जुड़ा हुआ ब्याज भी आगे ब्याज कमाता है, यानी ब्याज पर ब्याज।
अवधिउधार के शुरू से चुकाने तक का समय। हिसाब के लिए इसे महीनों में बदला जाता है।
असली सालाना दरब्याज जुड़ने के असर समेत निकली सालाना दर। मासिक चक्रवृद्धि में 2 प्रतिशत मासिक का असली सालाना असर करीब 26.82 प्रतिशत होता है।
किस्त (EMI)हर महीने दी जाने वाली तय रकम, जिसमें ब्याज और मूलधन का हिस्सा दोनों होता है।
घटता मूलधनजब हर किस्त के बाद मूलधन घटता है और ब्याज सिर्फ बचे हुए मूलधन पर लगता है।

भाग 09अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

2 रुपये सैकड़ा में महीने का ब्याज कैसे निकालें?

मूलधन × 2 ÷ 100। जैसे ₹10,000 पर ₹200 और ₹50,000 पर ₹1,000 महीने का ब्याज बनता है।

2 रुपये सैकड़ा सालाना कितने प्रतिशत होता है?

24 प्रतिशत सालाना, क्योंकि 2 प्रतिशत मासिक × 12 महीने = 24 प्रतिशत।

2 रुपये सैकड़ा में साल का ब्याज कितना होता है?

साधारण ब्याज में मूलधन का 24 प्रतिशत। जैसे ₹10,000 पर ₹2,400 और ₹50,000 पर ₹12,000।

2 रुपये सैकड़ा में 6 महीने का ब्याज कैसे निकालें?

मूलधन × 2 ÷ 100 × 6, यानी मूलधन का 12 प्रतिशत। जैसे ₹10,000 पर ₹1,200।

2 रुपये सैकड़ा में रोज का ब्याज कितना होता है?

महीने के ब्याज को 30 से भाग दें। ₹10,000 पर ₹200 ÷ 30 = करीब ₹6.67 रोज।

2 सैकड़ा और 3 सैकड़ा में क्या फर्क है?

2 सैकड़ा सालाना 24 प्रतिशत और 3 सैकड़ा सालाना 36 प्रतिशत बैठता है। ₹10,000 पर साल का ब्याज ₹2,400 बनाम ₹3,600 होगा।

चक्रवृद्धि में 2 रुपये सैकड़ा का साल भर का ब्याज कितना बनेगा?

मासिक चक्रवृद्धि में 1 साल का ब्याज मूलधन का करीब 26.82 प्रतिशत होता है, यानी ₹10,000 पर लगभग ₹2,682। साधारण ब्याज में यह ₹2,400 होता है।

अगर सिर्फ ब्याज की रकम पता हो तो दर कैसे निकालें?

सैकड़ा = ब्याज × 100 ÷ (मूलधन × महीने)। कैलकुलेटर में "सैकड़ा दर निकालें" चुनकर भी यह तुरंत देख सकते हैं।

2 रुपये सैकड़ा में दिनों का ब्याज कैसे जोड़ें?

दिनों को 30 से भाग देकर महीनों में बदलें और उसे महीनों में जोड़ दें। 15 दिन = 0.5 महीना। या कैलकुलेटर में तारीख चुनें, अवधि अपने आप भर जाएगी।

क्या 2 रुपये सैकड़ा ज्यादा दर है?

यह सालाना 24 प्रतिशत बैठता है, जो कई बैंक लोन की दर से ऊपर है। फैसला लेने से पहले अलग-अलग विकल्पों की दर सालाना प्रतिशत में बदलकर तुलना करें।

2 रुपये सैकड़ा में किस्त (EMI) कितनी बनेगी?

घटते मूलधन पर ₹10,000 के लिए 12 महीने में मासिक किस्त करीब ₹946 बनती है और कुल ब्याज करीब ₹1,347 होता है। सीधे ब्याज में यही ब्याज ₹2,400 होता।

सीधे ब्याज और घटते मूलधन वाले ब्याज में क्या फर्क है?

सीधे ब्याज में पूरी अवधि तक पूरे मूलधन पर ब्याज लगता है। घटते मूलधन में हर किस्त के बाद मूलधन कम होता है और ब्याज सिर्फ बचे हुए पर लगता है, इसलिए कुल ब्याज कम बनता है।

क्या ₹20,000 से ज्यादा का कर्ज नकद में दे या ले सकते हैं?

आम तौर पर नहीं। आयकर कानून की धारा 269SS और 269T के अनुसार ₹20,000 या ज्यादा का कर्ज बैंक ट्रांसफर या अकाउंट-पेयी चेक जैसे तरीके से ही लेना-चुकाना चाहिए। अपने मामले में CA से पुष्टि कर लें।

ध्यान दें: हर राज्य में निजी साहूकारी की अधिकतम दर और लाइसेंस के अपने नियम हैं। ऊंची दर पर लेन-देन से पहले अपने राज्य का नियम देखें या वकील से सलाह लें। यह लेख सामान्य जानकारी है, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं।
आशिक पठान

आशिक पठान संस्थापक

नमस्ते! मैं आशिक पठान हूँ, कोटा राजस्थान से। 10+ साल का ब्लॉगिंग अनुभव। इस वेबसाइट का मकसद आसान हिंदी में सेकड़ा ब्याज और लोन कैलकुलेटर उपलब्ध कराना है।

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