फसल बीमा कैलकुलेटर (PMFBY) - प्रीमियम और दावा राशि निकालें
PMFBY योजना की पूरी जानकारी
प्रीमियम दरें: खरीफ़ फ़सलों पर 2%, रबी पर 1.5%, और व्यावसायिक/बागवानी फ़सलों पर 5% — यह किसान का हिस्सा है, बाकी सरकार वहन करती है।
पात्रता: कोई भी किसान (मालिक, बटाईदार, किरायेदार) अधिसूचित क्षेत्र में अधिसूचित फ़सल उगाकर आवेदन कर सकता है। KCC/फसल ऋण लेने वाले किसानों के लिए यह अब स्वैच्छिक है (पहले अनिवार्य था), 2020 से चाहें तो opt-out कर सकते हैं।
दावे के प्रकार:
- व्यापक नुकसान (Yield Index) — सीमांक उपज से वास्तविक उपज कम होने पर, क्षेत्र-स्तर पर आकलन
- स्थानीय आपदा (Localized) — ओलावृष्टि, भूस्खलन, बाढ़ से जलभराव — व्यक्तिगत स्तर पर आकलन, 72 घंटे में सूचना ज़रूरी
- फ़सल कटाई के बाद नुकसान — कटाई के 14 दिन तक खेत में रखी फ़सल पर भी कवरेज
आवेदन: KCC/फसल ऋण लेने वालों का प्रीमियम अपने-आप लोन खाते से कटता है। बाकी किसान pmfby.gov.in पर या बैंक/CSC सेंटर से आवेदन कर सकते हैं। खरीफ़ की आख़िरी तारीख़ आमतौर पर 31 जुलाई, रबी की 31 दिसंबर होती है।
यह जानकारी आम समझ के लिए है, आधिकारिक बीमा सलाह नहीं। प्रीमियम दरें, बीमित राशि और दावा नियम राज्य/फ़सल के अनुसार बदल सकते हैं — आवेदन से पहले pmfby.gov.in या अपनी बैंक शाखा से मौजूदा नियम ज़रूर पुष्टि करें।
स्रोत: PMFBY दिशानिर्देश, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय — अगस्त 2026 तक अपडेटेड
फसल बीमा कैलकुलेटर (PMFBY Premium Calculator) दो काम करता है — पहला, यह बताता है कि प्रधानमंत्री फ़सल बीमा योजना के तहत आपको कितना प्रीमियम चुकाना होगा (खरीफ़ 2%, रबी 1.5%, व्यावसायिक/बागवानी फ़सलों पर 5%)। दूसरा, अगर फ़सल खराब हो जाए तो Yield Index फ़ॉर्मूले के आधार पर अनुमानित दावा राशि भी दिखाता है।
फसल बीमा और फसल ऋण में फ़र्क़
अक्सर किसान इन दोनों को मिला-जुला समझते हैं। फसल ऋण (KCC के ज़रिए) एक कर्ज़ है — आप बैंक से पैसा लेते हैं और ब्याज सहित वापस चुकाते हैं। फसल बीमा (PMFBY) एक सुरक्षा कवच है — आप एक छोटा-सा प्रीमियम देते हैं, और फ़सल खराब होने पर कंपनी आपको claim देती है, वापस चुकाने की ज़रूरत नहीं। जब आप KCC लेते हैं, तो अक्सर बीमा प्रीमियम अपने-आप लोन खाते से कट जाता है — इसीलिए दोनों साथ सुने जाते हैं, पर यह अलग-अलग चीज़ें हैं।
प्रीमियम इतना कम कैसे है
PMFBY की सबसे बड़ी ख़ासियत यही है — किसान सिर्फ़ 1.5% से 5% तक का हिस्सा चुकाता है, जबकि असली (actuarial) प्रीमियम कहीं ज़्यादा होता है। बाकी पूरा हिस्सा केंद्र और राज्य सरकार मिलकर चुकाती है — आमतौर पर 50:50 के अनुपात में, पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों में 90:10 के अनुपात में (केंद्र ज़्यादा हिस्सा देता है)।
दावा राशि कैसे तय होती है
व्यापक (widespread) नुकसान के लिए Yield Index फ़ॉर्मूला इस्तेमाल होता है — राज्य कृषि विभाग हर फ़सल के लिए पहले से एक "सीमांक उपज" (Threshold Yield) तय करता है। अगर उस साल की असली उपज इससे कम रहती है, तो कमी के अनुपात में दावा राशि मिलती है। लेकिन ओलावृष्टि, भूस्खलन या बाढ़ जैसी स्थानीय आपदा का आकलन अलग तरीक़े से, खेत-दर-खेत होता है — इसके लिए नुकसान होने के 72 घंटे के अंदर PMFBY ऐप या हेल्पलाइन पर सूचना देना ज़रूरी है, वरना दावा खारिज हो सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
फसल बीमा का प्रीमियम कितना होता है?
खरीफ़ फ़सलों पर 2%, रबी फ़सलों पर 1.5%, और व्यावसायिक/बागवानी फ़सलों पर 5% — यह बीमित राशि का किसान का हिस्सा है, बाकी सरकार चुकाती है।
क्या फसल ऋण लेने पर बीमा अनिवार्य है?
पहले अनिवार्य था, पर 2020 से यह स्वैच्छिक (voluntary) है — KCC/फसल ऋण लेने वाले किसान चाहें तो PMFBY से opt-out कर सकते हैं।
दावा राशि कैसे मिलती है?
व्यापक नुकसान पर Yield Index फ़ॉर्मूले से — सीमांक उपज और वास्तविक उपज के अंतर के अनुपात में। स्थानीय आपदा (ओलावृष्टि/बाढ़) पर खेत-दर-खेत सर्वे से, जिसकी सूचना 72 घंटे के अंदर देनी होती है।
बीमा आवेदन की आख़िरी तारीख़ क्या है?
खरीफ़ फ़सलों के लिए आमतौर पर 31 जुलाई, और रबी फ़सलों के लिए 31 दिसंबर — पर सटीक तारीख़ राज्य और फ़सल के अनुसार बदल सकती है, pmfby.gov.in पर पुष्टि करें।
यह जानकारी आम समझ के लिए है, आधिकारिक बीमा सलाह नहीं। प्रीमियम दरें, बीमित राशि और दावा नियम राज्य/फ़सल के अनुसार बदल सकते हैं — आवेदन से पहले pmfby.gov.in या अपनी बैंक शाखा से मौजूदा नियम ज़रूर पुष्टि करें। स्रोत: PMFBY दिशानिर्देश, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय — अगस्त 2026 तक अपडेटेड।